निश्चिंत होकर बैठे थे कि चलो पहरेदार तो है।
लोगों की सुख-सुविधा का ख्याल रखे ऐसी सरकार तो है।
लेकिन कोरोना काल में कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा, हम इतने संवेदनहीन हो चुके थे।ऑक्सीजन को एयरलिफ्ट तो किया तब तक कई जानें खो चुके थे।
व्यवस्था तो बस चुनावी वादों में हुआ, धरातल पर व्यवस्था वाकई बेकार तो है।
सिर्फ कोरोना ही तबाही नहीं मचाया,
इतनी मौत के पीछे कहीं न कहीं ये सिस्टम भी जिम्मेदार तो है।
अस्पताल की कमी अब खल रही है।
ऑक्सीजन और मास्क के बिना जिंदगी नहीं संभल रही है।
भगवान अब तो आप ही कुछ चमत्कार करो।
लोग यूँ ही कब तक मरेंगे आखिर कुछ तो विचार करो।


