कैसी तेरी खुदगर्जी कैसी तेरी माया।

नौकरी तो दिया नहीं, अर्थव्यवस्था भी बचा नहीं पाया।

मन की बात सुन सुनकर पक चुका हूँ।

नौकरी के लिए भटक भटक कर थक चुका हूँ।

सरकारी से लेकर निजी संस्थानों तक, सबकी हालत हुई है खराब।

बेरोजगारी अपनी चरम सीमा पर, पूरा देश माँग रहा है जवाब।