जश्न कैसी आजादी का क्या
मां बहन बेटी की बर्बादी का

बलिदान अमर जवानों की
आजादी के उन दीवानों की
सब कुछ हो जाता है व्यर्थ
जब कोई मां का लाल
किसी मां बहनों को
करता है निर्वस्त्र
जश्न मनाए कैसी आजादी
क्या  लूटते देश के खजानों का
या फिर आत्महत्या करते किसानों का
या भुल चुके भारतीय संस्कारों का
या धर्म के नाम पर लड़ते
मजहब के ठेकेदारों के व्यपारों का
जश्न मनाए कैसी आजादी का