धरती पर रहता इंसान दौलत गिनता है,

कल कितनी थी और आज कितनी बढ़ गई।




ऊपर बैठा ईश्वर हंसता है

और इंसान कि सांसें गिनता है,

कल कितनी थी और आज 

कितनी कम हो गई।




"निशु"