बचपन की बीती बातों को मैं भूल कभी न पाती प्यार तो बहुत करती हूं ।आपसे मां बस इजहार नहीं कर पाती हूं। रुठ जाए खुदा भी पर आप न रूठना कभी। टूट जाऊं अगर मैं कभी आप न टूटना आपको देखकर ही कुछ करने की हिम्मत आती है देना हौसला जब भी कमजोर पाओ मुझे चाहती हूं। जब भी रोऊ आप ही गले लगाओ मुझे !आप नहीं होती साथ तो खुद को बहुत अकेला पाती हूं प्यार तो बहुत करती हूं मम्मा बस इजहार नहीं कर पाती जाने अनजाने ही सही आपका दिल दुखाया है ,मैंने आज इस अनकही बातों को पन्नों पर उतारा है मैंने जिंदगी के कुछ कठिन फैसलों मे सलाह आपकी ही चाहती हूं मैं प्यार तो बहुत करती हूं बस इजहार नहीं कर पाती हूं।
शादी क्यों करें किसी गैर पर ऐतबार बताओ क्यों बसाए नया घर बार बताओ मैं जिंदगी भर आपके और पापा के साथ रहना चाहती हूं प्यार तो बहुत करती हूं मां बस इजहार नहीं कर पाती हूं।
मां ♥️
"निशु"


