मैं गुड़िया एक छोटी हूं ।

हंसती खेलती रोती हूं।

समझ कहा मुझे दुनिया की अभी तो मैं मम्मा की गोद में सोती हूं नहीं पता मुझे गलत सही साथ सबके घूल जाती हूं। अजनबी दिखे कोई तो अंकल कह कर बुलाती हैं मेरे लिए ना मन में ना कोई बुरा विचार भरो ।दुष्कर्म जैसी घटना से मानवता को ना शर्मसार करो सुनकर आज कल की खबरें उदास बहुत में होती हूं।

मैं गुड़िया एक छोटी हूं।

हसती खेलती रोती हूं।

 मैं छुटकी मासूम सब के पास चली जाती हूं मीठी मीठी बातें करके मन सब का बहलाती हूं। साथ में मेरे रेप हत्या जैसा ना घिनौना पाप करो ।देखो मुझे बस अपने बच्ची जैसा हवसी नजर का चश्मा साफ करो ।मैं नासमझ होकर भी यह बातें थोड़ा समझ के रोती हूं ।मैं गुड़िया एक छोटी हंसती खेलती हूं। 

रोक लो अब यह सब होने से वह गुड़िया किसी आंगन की खोने से सहमी हुई ।जो सिसक रही है किसी अंधेरे कोने में । बदलोगे जो नजरिया अपना तो बस समझो यही इंसाफ होगा ।वरना पछताओगे तुम भी एक दिन जब ऐसा तुम्हारे किसी अपने के साथ होगा। हूं तो बहुत छोटी पर यह बात बड़ी में कहती हूं। मैं गुड़िया एक छोटी हूं हंसती खेलती रोती है ।


            "निशु"