इस जिंदगी से दोस्ती कर हमने भी सीख लिया,
गर खुश रहना है यहाँ,
तो इक विदूषक बनकर रह,
वही जो होठों पे मुस्कान लिए,
चहेरे पे मजाकिया अंदाज,
बस अंदाज़ ही तो उसका निराला है।
इसी लिए तो वह मसखरा है।
लोगों के चहेरे पे मुस्कान देख वह खुश हो जाता,
हाँ जनाब उसे इसके सिवा और कुछ न आता,
जिंदगी के खुरदुरे पहलू को उसने छुपा लिया,
आंसुओं के सैलाब में भी हंसी का दीपक जला लिया,
विदूषक ही तो है जो हमें सिखलाता है,
कि जिंदगी का असली सार क्या है।
जिंदगी के इसपार और उसपार क्या है!


