वह तो बच्चा था,

निखर गया क्यों?

आइने में प्रतिबिंब था किसका?

उस बच्चे की या समाज की काली छाया थी,

प्रतिबिंब में समाया कैसे?

जिसकी छाया से भी चिढ़ता था,

उसे अपनाया कैसे?

लोग अपशब्दों के वाण चलाते थे,

वह सहज भाव हो जाता था।

रब क्या-कुछ करवाता था,

न जाने क्या सिखलाता था?

कर्मभूमि के शून्यवीर को,

भावों में गोते लगवाता था!

बच्चे सा सूक्ष्म ह्रदय को,

विराट रूप दे जाता था।

अंधकार सा करता हर पल,

पर मन का दीपक जलाता था।

परिचित डगर अवरोधक था,

नए-नए डगर बुनता था।

वह रब था,

न जाने क्या-कुछ सिखलाता था!