ये दिन क्यों होता है?
ये शामें क्यों होती हैं?
ये घना अंधेरा क्यों होता है?
ये खुशनुमा सवेरा क्यों होता है?
यह चक्र कैसा है?
समय का,
यह समय कितना दयालु है,
समझाता है पर नसमझ बना जाता है।
बुलाता है पास पर पहुंचने नहीं देता,
सुनाता है लोरी पर सोने नहीं देता,
दिखाता है भण्डार पर लेने नहीं देता,
कहता नहीं कुछ पर सुनाई सब पड़ता है!
हम किराएदार हैं समय के बस!


