जीवन के कौतुहल में,
अनन्त विचारों के बुलबुले में।
मेघगर्जनों के बीच हृदय का,
अस्थायी परिवर्तन होता है।
न जाने कब-क्यों-कैसे,
मानवता का विकास अजब होता है!
रुक-रुकके चलने का परिणाम विलम्ब होता है।।
सुबह-शाम,दिन-रात का लेखा-जोखा होता है।।
पता चलने तक अंधकार बड़ा होता है!
लोगों का लोगों तक पहुंचने का,
इंतजार खिंचा होता है!
मानवता का विकास अजब होता है !


