कोयल सी मीठी कूक हूँ

जो हर जुबाँ पे गुनगुनाए,

वह गीत हूँ।

जिसको न कोई डाली भाए

मैं उड़ता एक परिंदा हूँ।

जो गलियाँ-गलियाँ भटके

ऐसा मैं पागल आवारा हूँ।

जो ख़ुद ही ख़ुद को मंत्रमुग्ध हो देखे

ऐसा कोई नजारा हूँ।

मैं इलाहाबाद का प्यारा हूँ

मैं निराला का दुलारा हूँ!






#अतुलकीकलमसे