कुछ करो जतन ए मेरे सनम

ये दूरियाँ मिट जाएं

ये रात अंधेरी काली विरहा की

मिलन में बदल जाए

मैं तड़पूं यहाँ तू बेचैन वहाँ

अब बस दिल को करार आ जाए

कुछ करो जतन ए मेरे सनम

यादों का सिलसिला अब खत्म हो जाए

यादों के जहाँ से निकल हकिकत तू हो जाए

कुछ करो जतन ए मेरे सनम