ना औकात पुछता हूँ कभी कीसी की
ना अपनी हैसियत किसी को बताता हूँ
अरे मैं तो वो हूँ जो ठोकरों पे अपनी
ज़माने को रखता हूँ
मगर ठोकर कभी किसी को मारता नहीं


ना औकात पुछता हूँ कभी कीसी की
ना अपनी हैसियत किसी को बताता हूँ
अरे मैं तो वो हूँ जो ठोकरों पे अपनी
ज़माने को रखता हूँ
मगर ठोकर कभी किसी को मारता नहीं