ना दिन है ना रात है

उसके लिए सब एक समान है

ना थकती है ना रूकती है

उसके तकदीर में आराम जैसे हराम है

कभी परिवार कभी पत्नी

तो कभी बच्चो के लिए ही वो जीती है

खुद के लिए फुर्सत ही कहाँ

वो तो बस अपनों के लिए जीती है

वो स्त्री है उसके पास खुद के लिए

वक़्त ही कहाँ