नफ़रत की चिंगारी ने रिश्तों को जला

राख कर दिया

अपनो को ही अपने आंच से जख्मी कर दिया

जाने कितने घर फूंके कितनों को तबाह किया

एक छोटी सी चिंगारी ने

शोला बन जाने कितनों को बर्बाद किया

अपनो को दूर हमें खुद से ही अकेला किया