प्रीत पुरानी है ये

अधूरी कहानी है ये

ना राजा है ना रानी है

मिले थे दो दिल अंजाने से कभी

उस नादान मोहब्बत की नादान सी कहानी है ये

बरसात पहले सावन की

पहली फुहार सी थी वो

छूके दिल को दिल में उतर गई वो

लब खामोश थे आंखें उसके चेहरे से ना हटी थी

मैं कहीं और दिल कहीं और


ज़माने की ना खबर थी कोई

बस डूब रहे थे जैसे

दो दिल इश्क़ के दरिया में

ज़माना देख रहा था मिलन ये

अपनी खामोश आंखों से

गवाह बन रही थी ये पहले सावन की

पहली बरसात ये

यूँ उलझ रही थी आंखों से आंखें

जैसे आग लग रही थी बरसात मे

ना होश था ना जमाने की परवाह कोई

मदहोश आलम था नशे में जैसे मौसम


एक हो रहे थोड़ा दिल और दो धड़कन

सांसों से सांसें मिल रही थीं

इश्क़ के फूल मोहब्बत की बगीया में

खिल रहे थे

आज भी याद है वो संगम

जब दो अंजान एक दूजे की जान हुए थे

ज़माने की नज़रें में खटके

मगर इश्क़ की मिसाल बन रहे थे