सीखा नही प्रेम में बांधना कभी तुमको
और जो सीखा नही वो आता नहीं मुझको
आता नही मुझको प्रेम में नदियों का प्रवाह बाँधना
प्रवाह बाँधने से नदियाँ मैली हो जाया करती है
मुझे प्रेम में शोक हुआ
और शोक में प्रेम
प्रेम करना कभी आसान नही होता
आसान नही होता पहाड़ बन जाना
जिसे नदी से वेग को बांधना हैं
और उसे स्वतन्त्र भी रखना है
स्वतंत्र तो कर दिया मैने किन्तु
सीखा नही प्रेम में बांधना कभी तुमको
और अगर बांध देता तो
कभी प्रेम न होता मुझको


