नही है अब मुझे प्यास और 

न भूख है अनाज की

खा गया हूं मैं ईर्ष्या का पूरा खेत

पी गया हूं घृणा का पूरा सागर

अब तो बस मुझे चाहिए रक्त मनवता का

सेंकना है उसे नैतिकता की आग में

इस आग के लिए चाहिए होगी कुछ जलावन

सो जला दूंगा मैं गीता फूँक दूंगा कुरान

मैं मानव हूँ किन्तु मानवता मेरा धर्म नही 

मैंने ढूंढ लिया है अपना धर्म 

अब उस धर्म को स्वयं मे भस्म करूँगा

देखूंगा खुद का अंधकार, करूणा को नग्न करूँगा

बनाऊंगा एक भीड़ जो काटेगी राम के नाम पर

जो जलायेगी घर अल्लाह के लिए

दे दूंगा अस्त्र तर्कों के और सस्त्र अधूरे ज्ञान का

स्वार्थनुरूप छाँट लूंगा ज्ञान गीता कुरान का

क्यूकि मैं मानव हूँ किन्तु मानवता मेरा धर्म नही