रूठ जाऊं में तो वो मुझे मनाते थे

खुश अगर हूँ मैं तो साथ मुस्कुराते थे

मेरे लिए वो हर मुसीबत से लड़ जाते थे

वो मेरे दोस्त ही थे जो मेरा हर पल साथ निभाते थे,,

राहों में हों कांटे तो फूल बन बिछ जाते थे

लड़खड़ाने लगे कदम तो सहारा बन जाते थे 

माना थोड़े कमीने थे शरारतें कर जाते थे

पर वो मेरे दोस्त ही हैं जो हर पल मेरा साथ निभाते थे,,

ज़िन्दगी की राह में सब अलग अलग हो गए

ज़िमेदारियों के बोझ में इधर उधर खो गए

मिलने जुलने का सिलसिला अब कम हो गया है

देर रात तक गप्पें मारना अब बन्द हो गया है

दुनिया कि इस भीड़ में अकेलापन महसूस होता है

आसां हो जाता है सफर अग़र दोस्त साथ होता है,,

चलो आज फिर से एक शरारत करते हैं

कुछ पल ज़िन्दगी के चुपके से चुरा लेते हैं

खुशियों की पतंग जो कांहीं अटक गई थी झाड़ी में

निकाल के आज उसको एक नई उड़ान भरते हैं

छोड़ के सारे मसले जीवन के फिर एक बार मिलते हैं

हंसते हैं,,मुस्कुराते हैं और फ़िर एक बार कहते हैं

हाँ यही तो मेरे दोस्त हैं जो हर पल मेरा साथ निभाते हैं,





https://youtu.be/b6v2SmPEa1k