आज ये सुनकर मुझे बड़ी हसीं आती है,

कि मेरे देश में हर चीज भावनाओ से जोड़ी जाती है|

बाकि दुनिया जिन चीजों की कदर बिन भावना के जुड़े ही करती है,

मेरे देश में भावनाओ से जोडकर भी , उन चीजों की जान निचोड़ी जाती है |


जैसे की बाकि दुनिया जिसे सिर्फ धरती मानती है, वो मेरे देश में धरती माँ कहलाती है |

और ये धरती माँ न जाने क्यों सबसे स्वच्छ धरतीयो की लिस्ट में नहीं आती है,

क्योकि चढ़ाकर गन्दगी का प्रसाद ,ये धरती माँ यहाँ देखो पूजी जाती है |


इस माँ के संस्कारी बच्चो द्वारा ये माँ रोज लूटी जाती है |

जो माँगा सब दे डाला इस धरती ने पर,

तुझे उपकार कहाँ ? ए मानव तू कितना लोभी ,तू कितना पापी है |

और हवा, पानी सब दूषित कर , बंजर करदी ये माटी है ,

इस हालत के बाद किस मुँह से कहते हो कि , यहाँ धरती पूजी जाती है


घर का कचरा इक्कठा कर तुम , नदियों में फेंक आते हो |

सडी गली लाशो को तुम , गंगाजल में बहाते हो |

फेक्ट्रियो का गन्दा पानी तुम नदियों के जल से मिलाते हो |

करके इतना अत्याचार फिर हर गंगे हर गंगे का जाप लगते हो |

करके इतने पाप किस मुँह से उस तट पर तुम, अपने पाप मिटने जाते हो |

खुद के फैलाये इस प्रदुषण से आज , जहर पिती समुचित जाती है,

और तुम किस मुँह से कहते हो कि , यहाँ नदियां पूजी जाती है ?


जिस माटी पर हरे भरे पेड़ो का आँचल होता था ,

लहराते थे खेल खलियान , जिनसे जीवन यापन होता था|

काट सब पेड़ो को तूने इमारतों से ढक डाला है ,

मिट्टी में कर कर के मिलावट , इसे जानलेवा कर डाला है ,

अब ये जहरीली मिट्टी , बीमारियों की फसल उगाती है |

हवा, पानी सब दूषित कर , बंजर करदी ये माटी है ,

और तुम किस मुँह से कहते हो कि , यहाँ माटी पूजी जाती है ?


जब सब कुछ पूजा जाता है, तो कौन ये प्रदूषण फैलता है ?

कौन नदियों को दूषित करता , तो कौन ये मिट्टी में जहर मिलता है ?

कौन धर्म है? कौन ग्रन्थ है? जो पूजनीय का शोषण करना सिखाता है ?

जब हर कोई इस देश में धर्म और संस्कृति के गीत गाता है ,

तो जाने क्यों मेरा संस्कारी देश सबसे स्वच्छ देशों की लिस्ट में कभी नहीं आता है|


                                       - प्रियंका चौधरी