नादिया ने जैसे अपना किनारा खो दिया

बाप ने जैसे बुढ़ापे का सहारा खो दिया

आया जो बेटे का शव तिरंगा ओढ़ कर

एक माँ अपनी आँख का तारा खो दिया


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आज़ादी के दिन भी मुफ़लिसी. में क़ैद

उस ग़रीब. बच्चे की मदद भला यहाँ करता कौन है

ख़रीद कर तिरंगा महज़ लगा लेते हैं दर-ओ-दीवारों पर

देश की ख़ातिर फ़ौजी के अलावा भला यहाँ मरता कौन है