* मां की ममता*

हंसना रोना और बचपन

की शरारतें,

गांव की गलियों में,

घूमने की खेलने की,

सब बातें,

मां के हाथों के बनें,

पूरी पकवान,

त्योहारों में मिलकर,

मचाते घूब धमाल,

आज भी याद आती है,

उन लम्हों की हर बातें,

मां की ममता की गोद में,

बीती हर रातें,

अब तो मां का आंचल भी,

हमसे दूर हट गया,

मन के हर तारों में मां का,

चेहरा छुपा रहता है,

बस यादें ही यादे,

रह गयी मन की,

अब तो अपनी उमर भी,

बीत गयी लड़कपन की,

अब ना वो पल लम्हे,

रहे अपने,

अब तो बस बीते,

दिनों के सुनहरे सपने,

मां हर पल तुम्हारी,

याद बहुत आती है#