*महगाई*
महगाई की मार बड़ी,
इसमें जनता भरी पड़ी,
सरकार रोज अभियान बनाएं,
महगाई को दूर भगाएं,
पर महंगाई दिन पर दिन,
सुरसा जैसी बढ़ती जाये,
ए जनता की दुखद घड़ी,
मंहगाई की मार बड़ी,
इसमें जनता मरी पड़ी,
आलू प्याज भी हो गया सोना,
आम जनता को बस रोना ही रोना,
पैसे का रोज भाव गिरे,
सामानों का रोज भाव बढे,
सरकारी वादों की झड़ी,
मंहगाई की मार बड़ी,
इसमें जनता मरी पड़ी,
पेट्रोल डीजल गैस हुआ राजा,
जिसने बजाया जनता का बाजा,
फल सब्जी खाना हुआ मुहाल,
जनता बन गई कंगाल,
ऐसी विपदा आन पड़ी,
मंहगाई की मार पड़ी, .
इसमें जनता मरी पड़ी, .


