*अनाथ आश्रम जाने से,

पहले मां अपनी संघर्ष,

बताती है।

हंस-हस कर गम,

पीना सीखा गम के,

साये में जीना सीखा,

गम के जो निकले आंसू,

मोती समझ कर हार बनाकर,

जीवन को श्रिगारित करना सीखा,

गम तो जीवन की हार नहीं,

चांद की हमको चाह नहीं,

गम की पथरीली राहों पर,

चल कर जीवन में मधुरस,

लाना सीखा,#