*बदलते रिश्ते*
जब हमने जीवन में लोगों के,
जीने का अंदाज़ देखा,
कुछ लगा अजीब रिश्तों ,
का अंदाज देखा,
जिन बच्चों पर मां बाप ने,
अपनी खुशियां न्योछावर कर दिया,
आज वही अपनी खुशियों के लिए,
मां बाप का परित्याग किया,
इस नये जमाने में जज्बातों का मोल कहा,
सिसक रहे इन रिश्तों में प्यार,
मुहब्बत का जोश कहां#


