उस दिन जब पिंजरे से रिहा हुईतब इतनी ऊंची उड़ान भरी की,अब आसमान ही मेरा आशियाना औरआसमान ही मेरी ज़मीं।
उस दिन जब पिंजरे से रिहा हुईतब इतनी ऊंची उड़ान भरी की,
अब आसमान ही मेरा आशियाना औरआसमान ही मेरी ज़मीं।