कुछ बदली सी है महक इस मोहल्ले की
इस गली में अब उसका मकान नहीं रहा।
आजकल सपनों में वो आने लगे हैं
आशिक़ी में रात भर जागना आसान नहीं रहा।
तेरे रूठ जाने पर भी मैं ज़िंदा रहता हूँ
अपनी मोहब्बत पर अब मुझे गुमान नहीं रहा।


कुछ बदली सी है महक इस मोहल्ले की
इस गली में अब उसका मकान नहीं रहा।
आजकल सपनों में वो आने लगे हैं
आशिक़ी में रात भर जागना आसान नहीं रहा।
तेरे रूठ जाने पर भी मैं ज़िंदा रहता हूँ
अपनी मोहब्बत पर अब मुझे गुमान नहीं रहा।