ख्वाहिशें मुझसे कहने लगी
कैसी ये तेरी दिल्लगी
ज़रा इश्क़ का इज़हार कर
अपने जज़्बात तू बयान कर
ना रख अरमानों को दबाकर
पलकों पे ख़्वाब सा सजाकर
ये वक़्त गुज़र ही जाएगा
फिर लौट के ना आएगा
किसी मंज़िल की तलाश में
तेरा दिलबर भी निकल जाएगा
इल्म भी ना है उसे
तेरे चाहत का मोहब्बत का
ज़रा इज़हार ऐ बयान तो कर
ऐ नादान तू इक्रार तो कर
तो क्या हुआ जो ना कहा
दिल को ये तसल्ली ही रहा
के अनकहा ना रह गया
ये इश्क़ तेरा पहला पहला
-- fitôori


