मैं लड़की हूं, इंसान हूं,
यूं दम मेरा तुम घोटो मत।
बढ़ते पांवों को रोको मत,
मां बात-बात पर टोको मत।
यूं डर कर जीना बहुत हुआ,
अब वार तुम सिखलाओ न।
एक झांसी की रानी जग को,
तैयार कर दिखलाओ न।
चुप रहकर सहना बहुत हुआ,
दुश्मन पर गिरती गाज़ बनूं।
तुम बोलने तो दो मुझे,
मैं एक बुलंद आवाज़ बनूं।
कुछ वीर रस से भी भरो मुझे,
सिर्फ करुणा रस से सींचो मत।
जग सैर भी तो करने दो,
यूं लक्ष्मण रेखा खींचो मत।
बढ़ते पांवों को रोको मत,
मां बात-बात पर टोको मत।


