बात वफ़ा की करते थे जो हरदम,
आज बग़ावत पर उतर आए हैं।
चैन आता था मेरे ही दर पर जिनको,
आज उनको गैरों के घर भाए हैं।
वो जो रो पड़ते थे मेरे जाने की बात पर
आज दरवाज़े तक छोड़ने आए हैं...।


बात वफ़ा की करते थे जो हरदम,
आज बग़ावत पर उतर आए हैं।
चैन आता था मेरे ही दर पर जिनको,
आज उनको गैरों के घर भाए हैं।
वो जो रो पड़ते थे मेरे जाने की बात पर
आज दरवाज़े तक छोड़ने आए हैं...।