खुदा है तुमसे कुछ सवालात मेरे,क्यों खो गये जस्बात मेरे!
इम्तहान यूं न लो मेरा,अब जिंदा नहीं एहसास मेरे!!
फिर दस्तक दे रही हैं छुपी हुई अंगड़ाईओं कि सिहरन, फिर महक रही उसके बदन की खुशबू, फिर मदहोश कर रही निगाहें!!
क्यो खेल रहे मेर टूटे हुए जस्बातो से,मत लो इम्तहान मेरा। बिखर। जाने दो मुझे टूटे हुए अरमान की तरह!!