दिल में तमाम नफ़रतें पाले बैठे हैैं
हर बात पे खंज़र निकाले बैठे हैं
रिश्ते जो थे सारे बिखरते रहे मगर लोग अपनी दौलत सम्हाले बैठे हैं
माँ नही थी तो अँधेरा रहा बहुत
बाहें पसार कर अब उजाले बैठे हैं
वो पागल कैसे आगे निकल गया
पीछे अभी भी सोचने वाले बैठे हैं
दिल तोड़ने का उसे क्यूँ मलाल हो
इंतजार में बहुत चाहने वाले बैठे हैं
दुश्मनों से कभी शिकवा नही रहा
आस्तीन में हम साँप पाले बैठे हैैं
तेरा काम है दुनिया को सम्हालना
हम तो अपना जाम सम्हाले बैठे हैं