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दिल में तमाम नफ़रतें पाले बैठे हैैं

दिल में तमाम नफ़रतें पाले बैठे हैैं
हर बात पे खंज़र निकाले बैठे हैं
रिश्ते जो थे सारे बिखरते रहे मगर लोग अपनी दौलत सम्हाले बैठे हैं
माँ नही थी तो अँधेरा रहा बहुत
बाहें पसार कर अब उजाले बैठे हैं
वो पागल कैसे आगे निकल गया
पीछे
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