दास्ता ए सफर ए जिंदगी क्या लिंखू

इंतज़ार लिखूं ओर सिर्फ तेरा नाम लिखूं


हमजोलियों का मसवारा है कोई और सही

दिल ए आरज़ू है कि सिर्फ तेरा इंतज़ार करूं


कितने इल्जाम लगाऊं कितने सिकवे तुझ पर

"सोहेल" मजाल है कि मैं कोई आह भरूं


क्या इंतजार यूं ही तो नही कर रहे है हम

नही ,हस्र में पहले खुदा से तुझे मांग सकूं


सोहेल ककनवी