कब आ रहे हो..?
एक सवाल जो रह गया है मेरे पास
अब भी निरुत्तर सा
तुम्हारे जाने के बाद..।
एक खामोशी सी छाई हुई है
चेहरे पे मेरे
जैसे इस सवाल ने मुझे जकड़ लिया हो
मैं खुद में कसा हुआ
फंदे में लिपटा हुआ
खुद से भी ये सवाल पूछ नहीं पाता हूँ,
बस निःशब्द सा
चुपचाप खड़ा हूँ
उसी दर पर
जहां तुमने पूछा था
हर बार मुझसे
कब आ रहे हो..?
- महेश "माही"

