चाय में, शक्कर की तरह, घोल कर के पीली है..ज़िंदगी, अब तेरी हर एक पेहेर जी ली है..शाम-ओ-ग़म रह गए है सिर्फ़, अब मेरे खाते..होश सम्भालूँ कैसे? तू जो इस क़दर नशीली है..मृदुल
चाय में, शक्कर की तरह, घोल कर के पीली है..ज़िंदगी, अब तेरी हर एक पेहेर जी ली है..
शाम-ओ-ग़म रह गए है सिर्फ़, अब मेरे खाते..होश सम्भालूँ कैसे? तू जो इस क़दर नशीली है..मृदुल