कहा था उन्ही से..

मेरा नाम लिख दें

जो दिल में हो धड़कता.. 

वो पैग़ाम लिख दें


लिखा उसने कुछ..

और बहुत कुछ बताया..

मगर उन लबों पर..

नाम, मेरा ना आया.. 


समझ कैसे लूँ

इनकों इकरार जनम

वो क़िस्सा सभीको 

था तुमने सुनाया..


तड़प अब रहा हूँ

के कुछ अन्सुना हो

के उनके ही हाथों 

ज़रा सा गुनाह हो..


वो लिख दें, “मृदुल” -

सिर्फ़ तुम हमनवा हो

ज़माने को भूल,

हमसे नज़दीकियाँ हों...

-मृदुल