मौन रहा मैंकुछ ना कहा..

ना समझोआवाज़ नहीं..


समझ सकें मेरी बातों को..

उनकी वो परवाज़ नहीं..


शब्द तुम्हारेतीखे तीखे..

धावों की आग़ाज़ नहीं..


टीस बहुत है मैंने झेली..

नई अनोखी बात नहीं..


सब ने अपना पक्ष सुनाया..

दिल धड़कन को कौन सूने?


इल्ज़ामों के ताने लेकर..

साथ सुहाना कौन बुने?


चेहरे की झुर्रियों में बन्द है..

अनुभव हर गुज़रे कल का..


रूह हमारी झाँक के देखो..

अब भी मुस्काता बचपन सा..

-मृदुल