दिल हैं ख़ाली, मकाँ भरा क्यों है?

पैसा काग़ज़ था, बना खुदा क्यों है?


लोग मिलते है, मगर दिल कहीं नहीं मिलते, 

भीड़ रिश्तों की यहाँ, प्यार पर ज़रा क्यों है?


साँसें चलती है, धड़कता भी-है, दिल सीन में,

या-ख़ुदा ज़िंदगी हमसे फिर, ख़फ़ा क्यों है?


जल गया सब, के हमने, जो भी ख़्वाब देखा था,

रंग अब खून का हरा क्यों है?


प्यार भी तो है यहाँ, मोल देख बिकता है,

पैसा रिश्तों से अब हो गया खरा क्यों है?


नश्वर इंसानियत नहीं होती

दोस्त पर दोस्त से डरा क्यों है?

  • मृदुल