फ़िलहाल इक उम्र सो रहा है,मुक़द्दर ही तो है मेरा..और वो कहते है मेरी आग़ोश में..सुकून के चार पल भी नहीं..
फ़िलहाल इक उम्र सो रहा है,मुक़द्दर ही तो है मेरा..
और वो कहते है मेरी आग़ोश में..सुकून के चार पल भी नहीं..