आवाज़ दें तो दें किसे,सन्नाटे भी यहाँ..गूँज चुरा लेते है..बाद एक रिश्ता ..निभाने की धुन में..लोग माज़ी को यहाँ,अपने भुला देते है..
आवाज़ दें तो दें किसे,
सन्नाटे भी यहाँ..
गूँज चुरा लेते है..
बाद एक रिश्ता ..
निभाने की धुन में..
लोग माज़ी को यहाँ,
अपने भुला देते है..