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सन्नाटे..


आवाज़ दें तो दें किसे,

सन्नाटे भी यहाँ..

गूँज चुरा लेते है..

बाद एक रिश्ता ..

निभाने की धुन में..

लोग माज़ी को यहाँ,

अपने भुला देते है..

— मृदुल
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