क़ातिल ने मेरे.. क़त्ल कर..
पूछा भी नहीं..
“ए मेरे यार..
क्या तू ज़िंदा है?
क्या तेरी चंद साँस..
बाक़ी है?
क्या अपनी हार पे..
शर्मिंदा है?”
वो तो हम है..
जो क़त्ल होकर भी..
तेरे हर वार पे..
हँस हँस के मिटे..
तेरी नज़रों के तीर..
से कट कर..
प्यार के नाम को..
रोशन कर उठे..
-मृदुल


