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परछाइयाँ


वफ़ा कर, मिली है रुसवाईयाँमहफ़िल सज़ाकर, मिली है तनहाईयाँ

खुदा जाने कैसी दौड़ है ज़िंदगी,हमसे अब भागती है, हमारी हि परछाइयाँ

— मृदुल
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