
उन्हें अब मेरी शायरी से जलन होती है
कौन बतलाए नज़्म उनको ही पिरोती है
हर एक हर्फ़ उनका ही बायाँ करते हैं
जब आग़ोश में वो लखते-जिगर रोती है
शब्द को जोड़ कर, लिहाफ़ जो बुना मैंने
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उन्हें अब मेरी शायरी से जलन होती है
कौन बतलाए नज़्म उनको ही पिरोती है
हर एक हर्फ़ उनका ही बायाँ करते हैं
जब आग़ोश में वो लखते-जिगर रोती है
शब्द को जोड़ कर, लिहाफ़ जो बुना मैंने
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