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नर या नारी


नर नाहीं नारी बड़ीबड़ा है उनका करम

करम करेजा धर्म समझकरना कर सोच विचार

मात नहीं कर सक़त हैपित्रू धर्म को पार

ना पित्रू कर सक़त हैममता क़ी बोछार..

— मृदुल
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