रेत से,अरमानों के कुछ,आज महल टूटे हैवो न थे,उनके ख़यालात भी,अब रूठे हैसमझ सके ना,वो मेरी अदाकारी यारों,ख़बर क्या थी उन्हें,मुस्कुराते लब झूठे है...
रेत से,अरमानों के कुछ,आज महल टूटे हैवो न थे,उनके ख़यालात भी,अब रूठे है
समझ सके ना,वो मेरी अदाकारी यारों,ख़बर क्या थी उन्हें,मुस्कुराते लब झूठे है...