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मुस्कुराते लब...


रेत से,अरमानों के कुछ,आज महल टूटे हैवो न थे,उनके ख़यालात भी,अब रूठे है

समझ सके ना,वो मेरी अदाकारी यारों,ख़बर क्या थी उन्हें,मुस्कुराते लब झूठे है...

— मृदुल
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