गमें ज़िंदगी को बताऊँ मैं कैसे?

मगर हाल दिल में छुपाऊँ मैं कैसे?


के चाहत का अपना तरीक़ा अलग है..

 बेवफ़ा ये तुमको सिखाऊँ मैं कैसे?


मोहब्बत का अपना सलीका अलग है..

मेरे हमनवा ये तुमको दिखाऊँ मैं कैसे?


है चाहत उन्हीं से चाहें जो हमको..

बता अब वो यादें मिटाऊँ मैं कैसे?


मेरा दर्द लब का तराना हुआ है..

के क़िस्से वो तुमको सुनाऊँ मैं कैसे?


अजब ज़िंदगी का फ़साना हुआ है..

कहीं और दिल अब लगाऊँ मैं कैसे?

-मृदुल