उन झील सी गहरी आँखों में,
मेरे दिलबर मैं खो जाऊँ,
तेरी धड़कन - दिल - साँसों को,
आग़ोश लिए मैं सो जाऊँ,
उन सुर्ख़ लबों की लाली से,
जीवन की सहर सजाऊँगा,
जो ख़्वाब सजें उन आँखों में,
सच कर इक रोज़ दिखाऊँगा,
उन रात से काली ज़ुल्फ़ों के,
साये को नैना तरसे है,
तेरा प्यार समेटें बदल अब,
छत पर दिन रैना बरसें है,
पल पल दूरी तुझसे - “धड़कन”,
चाहत की ज्योत जलती है,
उस ज्योत, के लौ, की गर्म तपिश,
तेरे स्पर्श की याद दिलाती है,
है अर्ज़ यही मेरी रब से,
स्वीकार हो मेरी प्रार्थना,
जीवन भर बन कर रहना तुम,
मेरे दिलबर - दिल - उपासना..
-मृदुल


