पुकारते है हमें..माज़ी से..कुछ रास्ते-मकाँ-दरख़्त..रिश्तों के तो किसी काम के..हम तब भी ना थे, शायद..
पुकारते है हमें..माज़ी से..
कुछ रास्ते-मकाँ-दरख़्त..
रिश्तों के तो किसी काम के..हम तब भी ना थे, शायद..