है चेहरे पे मासूमियत सी छलकती,
है आँखों में उनकी हया झलकती,
मुस्कुराहट है मोती पिरोए हुए से,
हैं ज़ुल्फ़ें भी नग़मे संजोए हुए से,
हटा लूँ नज़र कैसे उस शब नज़र से,
के दिल में अजब सा ये तूफ़ाँ उठा है,
तेरा दिल मेरे दिल का मेहमा हुआ है,
मेरा दिल तेरे दिल का मेहमा हुआ है,
-मृदुल

