हुए बदनाम, तेरी बज़्म, क्या ग़म है,
पुर्ज़ा-पुर्ज़ा उड़ी वो नज़्म, क्या ग़म है
हाले दिल बायाँ कर, हम जो यूँ दुशवार हुए,
है यही रीत, है यही रस्म, क्या ग़म है
तेरी हर याद, हर इक बात, दफ़न कर ली है,
कॉन सी प्रीत? कैसी क़स्म? क्या ग़म है,
जो ना वो नाम, जुड़ सका ना जो, तेरे आगे,
तो हुआ नाम, क्या वो नाम, क्या ग़म है
हुए बदनाम, तेरी बज़्म, क्या ग़म है,
पुर्ज़ा-पुर्ज़ा उड़ी वो नज़्म, क्या ग़म है
-मृदुल


